Monday, 28 February 2011

ज़िन्दगी की राहों में.....

इन्तेहा हुई इंतज़ार की मगर ज़िन्दगी के दर्शन हो गए
अक्सर देखा किए जिन्हें हम ख़्वाबों में आज वो मेरे हमसफ़र हो गए...

हम तो आस छोड़ चले थे ज़िन्दगी की
आरज़ुओं के इस शहर  में  तनहा इस कदर हुए...

जब ज़िन्दगी ने दी दस्तक हमारे दरवाज़े पर दबे पाँव
हम किसी भंवर की तरह उसे पाने के लिए हद से गुज़र गए...

ना मालूम था हमें क्या होता है मौत का डर
लेकिन जब चली ज़िन्दगी छोड़ के दामन हमारा हम सिहर गए...

उस ज़िन्दगी ने ना जाने कितने ही खेल खेले हैं संग मेरे
खुशनसीब हैं वो शख्स जो इस मुसीबत से तर गए...

मैंने गंवाए है अनगिनत पल ज़िन्दगी के लम्हों की गिनती में
वो क्या ख़ाक समझेंगे मेरा इंतज़ार जो वक़्त से पहले लौटकर घर गए...

सुना है मैंने लोगो की ज़ुबानी बहुत लम्बी है यह जिंदगानी
अगर किसी ने जिए हैं लम्हें ,गिन गिन के तारे उनके लिए तो ये बरस,दिन चार हो गए...

पहलू ज़िन्दगी का जिंदादिली मानते है जो लोग
चंद लम्हे ख़ुशी के उनकी ज़िन्दगी का आधार हो गए...

कुछ जीते हैं ज़िन्दगी शराब की तरह,अरसे गुज़ार देते हैं
थोड़ी सी पी ली,जब ख़त्म होने लगी माया,दूसरों के जीवन पे उधार हो गए...

मैंने देखा है दुनिया में लोगो को कराहते,तड़पते ज़िन्दगी के लिए
जिनपे रहमत हुई खुदा की,उनके लिए लम्हे ज़िन्दगी के उपहार हो गए...

मेरी बेकरारी क्या समझेंगे वो ज़ालिम
जिनके नज़र मिलते ही इकरार हो गए...

मैंने समझा उसे ज़िन्दगी,ये मेरी जुर्रत थी
उसने इसे खता समझा,मीलों के फासले दरमियां हुए और सदियों लम्बे ये इंतज़ार हो गए...

___________________________________________________प्रमोद सोरौत.....



Friday, 25 February 2011

ये आँखें मरवाएंगी.....

इन पलकों की कतारों में बसाया है उनको मग़र...
डरता हूँ कहीं आँखें खुली तो उन्हें खो न दूं...
एक सैलाब दफ़न है इस दिल में बरसों से...
ज़रा भी हलचल हुई तो रो ना दूं...

दिल की बात जो जुबां कहने में लडखडाती है...
ये आँखें ही तो है जो पल में सब बयान कर जाती हैं...

किसी को देखकर खुश होना, किसी की अदाओं पे मर मिटना...
सब आँखों का काम होता है...
मग़र आँखों को कोई नही पूछता , हमेशा दिल का नाम होता है...

दिल तो बस तमन्ना करता है, मुकाम तक पहुँचाना तो आँखों का काम होता है...
रात भर जगती है आँखें किसी की याद में, और बेचारा दिल मुफ़्त में बदनाम होता है...

जब सामने आते है वो, तो दिल सहम जाता है...
फिर चुपके से आँखें अपना काम कर जाती है...
और झुक के वो अदा से, हया से सब बयां कर जाती है...

ये बनती है गवाह अश्कों के सैलाब की...
कभी ख़ुशी की बारिश की, कभी रौशनी के सैलाब की...

आगाज़ से लेकर अंदाज़ तक,अंदाज़ से लेकर अंजाम तक इनका ही काम रहता है...
सब तो कहते है छुप-छुप के, ये आशिक सरेआम कहता है....

ये आँखें मरवाएंगी.....
ये आँखें मरवाएंगी.....

________________________________________प्रमोद सोरौत.....


jeevan ki kashti: क्या इत्तेफ़ाक है.....

jeevan ki kashti: क्या इत्तेफ़ाक है.....: "हमें तन्हाई मिली पर उन्हें भी महफ़िल नसीब ना हुई...क्या इत्तेफ़ाक है..... हमने उन्हें ढूँढा ख़्वाबों में मगर ना मिले वो ज़..."

क्या इत्तेफ़ाक है.....

हमें  तन्हाई मिली पर उन्हें भी महफ़िल नसीब ना हुई...क्या इत्तेफ़ाक है.....
हमने उन्हें ढूँढा ख़्वाबों में मगर ना मिले वो ज़िन्दगी तनहा हुई... क्या इत्तेफ़ाक है.....
कभी हम उन्हें भूलना चाहते थे आज उनकी ज़रुरत महसूस हुई...क्या इत्तेफ़ाक है.....
वो हमें चाहते थे जान से ज्यादा मगर अब उनकी जान पराई हुई...क्या इत्तेफ़ाक है.....
वो कहते हैं  हमें अपना जान-ए-जिगर पर हमारी न सुनाई हुई...क्या इत्तेफ़ाक है.....
इस दुनिया में बहुत शान थी हमारी पर आज जग हसाई हुई...क्या इत्तेफ़ाक है.....
हमारी दिल्लगी का आलम ना पूछो आज महफ़िल में बहुत रुसवाई हुई...क्या इत्तेफ़ाक है.....
जिसकी खातिर खुदा से की बगावत आज उनसे ही मेरी लड़ाई हुई...क्या इत्तेफ़ाक  है.....

_________________प्रमोद सोरौत.....