Friday, 25 February 2011

ये आँखें मरवाएंगी.....

इन पलकों की कतारों में बसाया है उनको मग़र...
डरता हूँ कहीं आँखें खुली तो उन्हें खो न दूं...
एक सैलाब दफ़न है इस दिल में बरसों से...
ज़रा भी हलचल हुई तो रो ना दूं...

दिल की बात जो जुबां कहने में लडखडाती है...
ये आँखें ही तो है जो पल में सब बयान कर जाती हैं...

किसी को देखकर खुश होना, किसी की अदाओं पे मर मिटना...
सब आँखों का काम होता है...
मग़र आँखों को कोई नही पूछता , हमेशा दिल का नाम होता है...

दिल तो बस तमन्ना करता है, मुकाम तक पहुँचाना तो आँखों का काम होता है...
रात भर जगती है आँखें किसी की याद में, और बेचारा दिल मुफ़्त में बदनाम होता है...

जब सामने आते है वो, तो दिल सहम जाता है...
फिर चुपके से आँखें अपना काम कर जाती है...
और झुक के वो अदा से, हया से सब बयां कर जाती है...

ये बनती है गवाह अश्कों के सैलाब की...
कभी ख़ुशी की बारिश की, कभी रौशनी के सैलाब की...

आगाज़ से लेकर अंदाज़ तक,अंदाज़ से लेकर अंजाम तक इनका ही काम रहता है...
सब तो कहते है छुप-छुप के, ये आशिक सरेआम कहता है....

ये आँखें मरवाएंगी.....
ये आँखें मरवाएंगी.....

________________________________________प्रमोद सोरौत.....


2 comments:

  1. Pramod bhai ankhon ki nai explanation acchi lagi.. Subhakamanaye or dhanayawad kept up..

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